सोहनी सोहनी लागे आज मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दरबार लगे बड़ा प्यारा शिंगार सजा बड़ा प्यारा के नजर उतारो जी मैया की

सोहनी सोहनी लागे आज मैया प्यारी प्यारी लागे आज

सोने का मुकट सिर सोहे प्यारा मुखड़ा मन को मोहे,

की नजर उतारो जी मैया की

सोहनी सोहनी लागे आज मैया प्यारी प्यारी लागे आज

गल नो लख हार निराला कानो में कुंडल काला

की नजर उतारो जी मैया की

सोहनी सोहनी लागे आज मैया प्यारी प्यारी लागे आज

माथे बिंदिया का लश्कारा पेहने माँ कंगना प्यारा

की नजर उतारो जी मैया की

सोहनी सोहनी लागे आज मैया प्यारी प्यारी लागे आज

चुनरी की शोभा न्यारी तेरी प्यारी शेर सवारी

की नजर उतारो जी मैया की

सोहनी सोहनी लागे आज मैया प्यारी प्यारी लागे आज

रजनी तू माँ को रिजा ले चोखानी भीगडी बना ले

की नजर उतारो जी मैया की

सोहनी सोहनी लागे आज मैया प्यारी प्यारी लागे आज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।