बाबा जहाँ हम हैं वहाँ इसके सिवा जाना कहाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बाबा जहाँ हम हैं वहाँ,इसके सिवा जाना कहाँ,

जो चाहे हमको आवाज दे,

हम हैं वहीँ, बाबा जहाँ,

अपना यहीं सारा जहाँ,

इसके सिवा जाना कहाँ।

बाबा से प्रीत, मिलती है जीत,

आके यहाँ कोई हारा नहीं,

सबका सहारा, श्याम मेरा,

कोई यहाँ पे सहारा नहीं,

मांगे बिना, मिलता यहाँ,

इसके सिवा जाना कहाँ,

बाबा जहाँ हम हैं वहाँ,

इसके सिवा जाना कहाँ,

कोई हमें पागल कहे,

हाँ हम दीवाने हैं, दातार के,

पागल हम, दीवाने हम,

मिलते ठिकाने सरकार के,

हाथों में हैं, सबके निशान,

इसके सिवा जाना कहाँ,

बाबा जहाँ हम हैं वहाँ,

इसके सिवा जाना कहाँ,

आया यहाँ इक बार जो,

फिर वो यहीं का हो जाता है,

बाबा का ही जादूगिरी,

दीवाना इसका ही हो जाता है,

चढ़ता है जब इसका नशा,

इसके सिवा जाना कहाँ,

बाबा जहाँ हम हैं वहाँ,

इसके सिवा जाना कहाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।