मेरा कान्हा रंग रंगीला

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा कान्हा रंग रंगीला मैं तो नाचूंगी,

होठो से मुरली बजाके मधु बन वे रास रचाके,

ऐसे खड़े मेरे सँवारे मेरे नैना हुए मेरे बावरे,

बद्री में आके नेना लड़ाके में तो नाचू गी,

होठो से वाजे मुरलिया करता है मीठी मीठी बाते,

एसी देखी है मैंने सँवारे घायल होई है मेरी अंखिया,

मधुवन में आके नेना लड़ाके में तो नाचू गी,

कान्हा की बात बातू गी जोबन पिया की बन जाऊगी,

इतना दिया है मेरे सँवारे महिमा में घर घर गाऊ गी,

सबको सुना के दिल में वसा के में तो नाचू गी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।