सहारा बन के आ जाओ अब तो महामाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कैसा समय है ये दुःख दाई बिछड़ रहे आपस में भाई,

खोज रही भाई को बेहना तरस रही बेटे को माई

सहारा बन के आ जाओ अब तो महामाई

ढूंड रही है देखो अखियाँ अपनों में अपनों को

कैसे करेगे पूरा अब देखे हुए उन सपनो को

कर न सके अपनों की विधाई जाने ये कैसी विपदा है आई

सहारा बन के आ जाओ अब तो महामाई

चारो तरफ है अन्धियारा और मायूसी है छाई

अब तो बचा लो दुनिया को तुझसे ही है आस लगाई

करनी होगी माँ अब सुनवाई

देर न कर अब हो जा सहाई

सहारा बन के आ जाओ अब तो महामाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।