ईशा पूरण बाला जी थारी पुरे मन की कामना

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सांचे मन से जो भी करो लध्यावाना

ईशा पूरण बाला जी थारी पुरे मन की कामना

जो भी इनकी ओट लेई फिर देह से आन पुकारा है

उनका तो बाला जी पल में सगला कारज सारा है

इनह चरना में अपनी अरज ल्गावाना

ईशा पूरण बाला जी थारी पुरे मन की कामना

जो भी इस दरबार आया मन में लेकर आशा जी

कदे नही आई है उनके जीवन माही निराशा जी

सब कोई राखो साँची मन की भावना

ईशा पूरण बाला जी थारी पुरे मन की कामना

करना से करना संकट इक किरपा से टल जावे जी

निर्धन हो धन वान बांज गोदी में लाल खिलावे जी

नित्य नियम से इनके दर्शन पावना

ईशा पूरण बाला जी थारी पुरे मन की कामना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।