म्हारे पग पग पे दादी खड़ी

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हाने चिंता है क्या की पड़ी म्हारे पग पग में दादी खड़ी

म्हारी दादी की किरपा है बड़ी म्हारे पग पग पे दादी खड़ी

लाख काँटा कोई भी बिछावे होवे वो ही जो दादी जी चाहवे,

म्हारे खातिर माँ हर दम लडी

म्हारे पग पग पे दादी खड़ी

म्हारे धन को न घर में तोडा म्हारो अनसु भरोडो है कोठो

रवे हर दम तिजोरी भरी म्हारे पग पग पे दादी खड़ी

चाहे कितनी ही आंधी सतावे चाहे पत झड़ माँ पता सुखावे,

म्हारी बगिया ने रखे हरी म्हारे पग पग पे दादी खड़ी

हर्ष था सु माँ इतना ही चाहवा हाथ सिर पे मैं थारो माँ पावा

राखे मोह्पे नजर हर घड़ी म्हारे पग पग पे दादी खड़ी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।