दीन दुखियों के पालक है राम जी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

पग पग पे दीं दुखियो के पालक है राम जी

क्या दुख जो अपनी नाव के चालक है राम जी

पग पग पे दीं दुखियो के पालक है राम जी

हो जाए कोई भूल तो करना हमे शमा

हम सब तुम्हारी गोद के बालक है राम जी

क्या दुख जो अपनी नाव के चालक है राम जी

जीवन की अपनी नाव भवर में जो आ फसी

फ़ौरन उबार देने के लायक है राम जी

क्या दुख जो अपनी नाव के चालक है राम जी

उनकी किरपा से काम ही रुकता न एक भी

चिंता में क्यों मरे जो सहायक है राम की

क्या दुख जो अपनी नाव के चालक है राम जी

केहने को देवताओं की ३५ है कोटियाँ

गजेंदर अनुज एक ही नायक है राम जी

क्या दुख जो अपनी नाव के चालक है राम जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।