बालाजी नाचे छम छम

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

राम की मस्ती में नाचे,

पाँव में घुंघरू है बाजे ll,

बजरंगी/बालाजी नाचे,,,जय हो ll,

बजरंगी नाचे, छम छम छम छम छम,

बालाजी नाचे, छम छम छम छम छम ll

हाथ घडताल बजाना जी,

राम की मस्ती में नाचे,

बजरंगी/बालाजी नाचे,,,जय हो ll,

बजरंगी नाचे, छम छम छम छम छम,

बालाजी नाचे, छम छम छम छम छम ll

राम की धुन में, रहता मगन ये,

"राम का सेवक, प्यारा", रे देखो l

राम प्रभु की, शरण में रहता,

"भरत सा लगता, प्यारा", रे देखो ll

राम का, बना हुआ दरबान,

है लीला, इनकी अजब महान,

बजरंगी/बालाजी नाचे,,,जय हो ll,

बजरंगी नाचे, छम छम छम छम छम,

बालाजी नाचे, छम छम छम छम छम ll

रोम रोम में, राम समाये,

"सूरत मन में, बसा ली", ये बाबा l

सीना फाड़, दिखाया जग को,

"लीला, अज़ब निराली", ये बाबा ll

हृदय में, सियाराम हैं इनके बिराजे,

राम की, भक्ति में है राजे,

बजरंगी/बालाजी नाचे,,,जय हो ll,

बजरंगी नाचे, छम छम छम छम छम,

बालाजी नाचे, छम छम छम छम छम ll

मेहंदीपुर में, ये बाबा तो,

"सबके संकट, काटे" बालाजी l

सालासर के, मंदिर में ये,

"झोली भर भर, बांटे" बालाजी

धाम है, दोनों जग से निराले,

सनेह तूँ, इनकी महिमा गा ले,

*बजरंगी/बालाजी नाचे,,,जय हो ll,

बजरंगी नाचे, छम छम छम छम छम,

बालाजी नाचे, छम छम छम छम छम ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।