दर्शन देख जीवां गुरु तेरा पूरण करम होय प्रभ मेरा

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॥ पावन पाठ ॥

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा पूरण करम होय प्रभ मेरा,

एह विनंती सुन प्रभु मेरे दे हे नाम कर अपने चेरे

अपनी शरण राख प्रभ दाते गुर प्रसाद किनै बिरले जाते,

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा पूरण करम होय प्रभ मेरा

सुणो बिनो प्रभ मेरे मीता चरण कमल बसे मेरे चिता,

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा पूरण करम होय प्रभ मेरा

नानक एक करे अरदास बिसर नाही पूरण गुण तास,

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा पूरण करम होय प्रभ मेरा

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा पूरण करम होये प्रभु मेरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।