कन्हैया कन्हैया तेरे दर आये हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया कन्हैया तेरे दर आये हैं,

दर पे तेरे झोली फैलाये हैं,

गोकुल में यशुदा का प्यारा बना,

अवध में तूँ दशरथ दुलारा बना,

वेद ग्रन्थों ने प्रभु तेरे गुण गाये,

दर में तेरे झोली फैलाये हैं,

ब्रज में तूँ बंशी बजैया बना,

अवध में तूँ धनुषर धरैया बना,

बन के नरसिंह प्रह्लाद अपनाये हैं,

दर पे तेरे झोली फैलाये हैं,

धनुष बाण में किसी को दर्शन दिया,

कभी मुरली तूने सुदर्शन लिया,

गीध गणिका अजामील अपनाये हैं,

दर पे तेरे झोली फैलाये हैं,

लंका में रावण को मारा तूने,

मथुरा में कंश पछाड़ा तूने,

तेरे हर रूप के राजेन्द्र गुण गाये हैं,

दर पे तेरे झोली फैलाये हैं,

गीतकार/गायक--राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।