माँ तुलसी तुम वंदनीय

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विश्वपावनी वृंदावनी माँ तुलसी तुम वंदनीय

विश्वपावनी वृंदावनी माँ कृष्णजीवनी..

भक्तिमयी शक्तिमयी माँ वृंदा

भक्तिमयी शक्तिमयी तुम आरोग्य प्रदायिनी

तुमसे ही मिटती व्याधियाँ

दुःख-क्लेश कष्ट निवारिणी

विश्वपावनी वृंदावनी तुम कृष्णजीवनी..

तुम्हें देख हर्षित हो नयन माँ वृंदा

तुम्हें छू के पुलकित हो पवन

तुम हो धरा की रौशनी

तुम से हरि का हो स्मरण

विश्वपावनी वृंदावनी तुम कृष्णजीवनी..

भगवदप्रिया विष्णुप्रिया माँ वृंदा

भगवदप्रिया विष्णुप्रिया अनुपम हैं माँ तेरी दया

कर्मों के बंधन काँटती

मुक्ति दिलाए सर्वदा

विश्वपावनी वृंदावनी माँ कृष्णजीवनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।