काली महाकाली कलकते वाली माँ

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कालो की महाकाली भवानी रूप लिए विकराल

काली महाकाली कलकते वाली माँ

कालो की महाकाली भवानी रूप लिए विकराल

मुंडो की माला ढाल भवानी आ गई माँ महाकाली

निकले लाल नैनो से ज्वाला मारे किलकारी काली

हां हां कार मची असुरो में लेके रूप विकराल

काली महाकाली कलकते वाली माँ

रक्त बीज के रक्त से काली अपनी प्यास बुजाती

शुम्भ निसुम्भ मधु केतव जैसे दानव मार गिराती,

मुंड काटे असुरो का मैया पीये रक्त की धार

काली महाकाली कलकते वाली माँ

काल भी गबराया माँ तुम से कालो की माँ काली

रन भूमि में कोई न माँ तुमसा शक्ति शाली

हुआ न ऐसा और न होगा दुनिया में अवतार

काली महाकाली कलकते वाली माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।