मेरा नाथ तू हैं नहीं मैं अकेला मेरे साथ तू हैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा नाथ तू हैं नहीं मैं अकेला मेरे साथ तू हैं

मेरा नाथ तू हैं..

चला जा रहा हूँ मैं राहों पे तुम्हारी

राहों पे आए जो तूफान भारी

थामे हुए हैं मेरा हाथ तू हैं

नहीं मैं अकेला...

तेरा दास हूँ मैं तेरे गीत गाऊँ

तुझे भूल के भी ना कभी भूल पाऊँ

तू ही हैं तात-बंधू, पिता-माता तू हैं

नहीं मैं अकेला...

ठाकुर हैं तू मैं तेरा पुजारी

तेरा खेल हूँ मैं तू मेरा खिलाड़ी

मेरी जिंदगी की हर एक बात तू हैं

नहीं मैं अकेला मेरे साथ तू हैं

मेरा नाथ तू हैं..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।