सिद्ध जोगी के द्वारे सुबह शाम नचदे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जय जोगी सिद्ध जोगी के द्वारे,

सुबह शाम नचदे देखे बड़े बड़े,

देखे आम नचदे सिद्ध जोगी के द्वारे,

पौणाहारी के द्वारे सुबह शाम नचदे,

सिद्ध जोगी के द्वारे सुबह शाम नचदे,

गुफा विच रहन्दा डेरा सात लाइयाँ ए,

आंदे नचदे ने सारे जदो जोगी तू बुलाया है,

आंदे नचदे ने सारे जदो जोगी तू बुलाया है,

जगा ढोल उते ढोल लौना सारे नचदे,

सिद्ध जोगी के द्वारे सुबह शाम नचदे,

मेरे बाबे दे द्वारे सुबह शाम नचदे

करम कमान्दा जो सारे संसार ते,

भरदा ए पल्ले जोगी जिंदगी संवार दे,

ओ जो लगिया ही रहन जेड़े नाम जपदे,

सिद्ध जोगी के द्वारे सुबह शाम नचदे

मेरे बाबे दे द्वारे सुबह शाम नचदे,

दुःख दरदा दा दारु तू ही मेरा सिद्ध जोगी,

ताहि सन्नी लुधियाना वाळा तेरा दा रोगी है,

गांवदा सचिन भेंट जो भी कंठ बसदे,

सिद्ध जोगी के द्वारे सुबह शाम नचदे

मेरे बाबे दे द्वारेसुबह शाम नचदे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।