सवेरे रसिया से हो गयी

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सवारे रसिया से हो गई अपनी यारी,

हो गई अपनी यारी, लागे बड़ी प्यारी

ये रसिया मोहे लागो प्यारो,

तीन लोक से यह है नयारो,

इनमे बसी बंकि सूरत मैं भी जाऊ बलिहारी,

सवारे रसिया से ...

यह रिश्ता नित सपने में आवे,

मीठी मीठी बतिये सुनावे,

जब यादो में पकड़न लगाई,

खुल गई आंख हमारी,

सवारे रसिया से .................

यह रसिया मेरो माखन चुरावे,

कुछ खावे ग्वालो को खिलावे,

इसने मेरा सब कुछ लुटा,

मेरा कुछ ना छोड़ा,

सवारे रसिया से ............

तन के उपर वारी आंखे,

लागे शवि बड़ी प्यारी प्यारी,

ब्रज में बंसी सूरत की,

सवारे रसिया से .............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।