मोर बोले चकोर बोले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोर बोले, चकोर बोले,

आज राधा के, नैनो में श्याम डोले ll

श्याम मेरी भीनी भीनी, अँखियों का कज़रा ll

वही मेरी सूनी सूनी, बहियों का गज़रा ll

हो,,,मेरे जीवन में ll, रस की फुहार बोले,,,

मोर बोले, चकोर बोले,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दूर से कन्हईया ने, मुझ को पुकारा ll

मुरली की धुन पे, किया है इशारा ll

हो,,,मेरे सपनो की ll, वीणा के तार बोले,,,

मोर बोले, चकोर बोले,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

आज मेरे मन की, लगन रंग लाई ll

प्यार का संदेसा, कृष्ण संग लाई ll

हो,,,मेरी बगिया में ll, छम छम बहार डोले*,,,

मोर बोले, चकोर बोले,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।