कन्हैया छोड़ दे मेरो हाथ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया छोड़ दे मेरो हाथ,

मोहे अब दे जाने दे कान्हाँ,

जाने दे कान्हा,

मोहे अब जाने दे कान्हा,

तेरो मैं कैसे छोड़ू तेरो हाथ,

आज तो माखन है खाना।

रोज रोज यूँ तंग करनो तेरो,

ठीक नहीं है कान्हा,

ठीक नहीं है कान्हाँ,

आते जाते रस्ता रोके,

माखन तो है तेरो बहाना,

छुप गया सूरज हो गई रात,

मोहे अब जाने दे कान्हा,

कन्हैया छोड़ दे मेरो हाथ,

मोहे अब दे जाने दे कान्हाँ,

पहले माखन दे फिर छोड़ू,

है ये अटल इरादा,

मुरली की फिर तान सुनाऊँ,

करता हूँ ये वादा,

राधे करता हूँ ये वादा,

राधे समझ मेरे जज़्बात,

आज तो माखन है खाना,

मोहे अब जाने दे कान्हा,

तेरो मैं कैसे छोड़ू तेरो हाथ,

आज तो माखन है खाना।

प्यार से माखन मांगो कान्हा,

चले ना जोरा जोरी,

करूँ शिकायत मैया से आवे,

अकाल ठिकाने तोरी,

मोहे नहीं रहनो अब तेरो साथ,

मोहे अब जाने दे कान्हा,

कन्हैया छोड़ दे मेरो हाथ,

मोहे अब दे जाने दे कान्हाँ,

बोले कान्हा सुन ले राधे,

क्यों ज्यादा इतराये,

तोहे कसम मेरे प्यार की जो ना,

मोहे माखन तू खिलाए,

लिखे भीमसैन जब हालात,

श्याम राधे का दीवाना,

मोहे अब जाने दे कान्हा,

तेरो मैं कैसे छोड़ू तेरो हाथ,

आज तो माखन है खाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।