कभी बेकसी ने मारा

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॥ पावन पाठ ॥

यह ग़ज़ल है न गीत हैं कोई

यह मेरे दर्द की कहानी हैं

मेरे सीने में सिर्फ हो

मेरे सीने में सिर्फ शोले हैं

मेरी आँखों में सिर्फ पानी हैं

कभी बेकसी ने मारा

कभी बेकसी ने मारा

ओह कभी बेबसी ने मारा

कभी बेकसी ने मारा

ओह कभी बेबसी ने मारा

गिला मौत से नहीं हैं

गिला मौत से नहीं हैं

मुझे ज़िन्दगी ने मारा

कभी बेकसी ने मारा

ओह कभी बेबसी ने मारा

मुक़द्दर पे कुछ जोर चलता नहीं

वोह मौसम हैं यह जो बदलता नहीं

मुक़द्दर पे कुछ जोर चलता नहीं

वोह मौसम हैं यह जो बदलता नहीं

कहीं थी यह बदनसीबी

ओह कहीं थी मेरी गरीबी

कहीं थी मेरी गरीबी

किस किस का नाम लूँ मैं

ओह किस किस का नाम लूँ मैं

मुझे हर किसी ने मारा

गिला मौत से नहीं है

गिला मौत से नहीं हैं

मुझे ज़िन्दगी ने मारा

कभी बेकसी ने मारा

ओह कभी बेबसी ने मारा

बेमुरव्वत बेवफा दुनिया हैं यह

है यही दुनिया तो क्या दुनिया हैं यह

बेमुरव्वत बेवफा दुनिया हैं यह

है यही दुनिया तो क्या दुनिया हैं यह

न कमी थी दोस्तों की

न कमी थी दुश्मनों की

ओह न कमी थी दुश्मनों की

कहीं दुश्मनी ने लूटा

कहीं दुश्मनी ने लूटा

कहीं दोस्ती ने मारा

गिला मौत से नहीं हैं

गिला मौत से नहीं हैं

मुझे ज़िन्दगी ने मारा

कभी बेकसी ने मारा

कभी बेबसी ने मारा

उजालों से वेशत मुझे हो गयी हैं

अंधेरों की आदत मुझे हो गयी हैं

उजालों से वेशत मुझे हो गयी हैं

अंधेरों की आदत मुझे हो गयी हैं

रहा जब तलक अँधेरा

ओह कटा खूब वक़्त मेरा

ओह कटा खूब वक़्त मेरा

मुझे चाँदनी ने लूटा

ओह मुझे चाँदनी ने लूटा

मुझे रौशनी ने मारा

गिला मौत से नहीं हैं

गिला मौत से नहीं हैं

मुझे ज़िन्दगी ने मारा

कभी बेकसी ने मारा

कभी बेबसी ने मारा

कभी बेकसी ने मारा

ओह कभी बेबसी ने मारा.

अपलोड- रवि सेन नरसिंहगढ़ "पांजरी"

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।