मां जोवा थारी बाट कहो जी अंबे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मां जोवा थारी बाट कहो जी अंबे,

आस टूटण लागी मां,

कि कद तक जोवां थारी बाट,

कहो कीनियाणी मां,

रिपु घन घनन घनन घण गाजै,

आंसुं देख अव्वल गती आजै,

साय करण मत देर लगाजै,

तरणी म्हारी भुजलंब तिराजै,

अब आस टूटण लागी मां,

कहो जी अंबा,

आस टूटण लागी मां ,

कि कद तक जोवां थारी बाट ,

कहो कीनियाणी मां....

जमपुर जाकर लाल ले आई,

झट महिषासुर मार भगाई,

साय करण शेखै के धाई,

झगड़ू री तरणी तिरवाई,

बिड़द मत भूलो मां,

कहो जी अंबे,

बिड़द थारो लाजै मां,

कि कद तक जोवां थारी बाट,

कहो कीनियाणी मां.....

आवड़ री थानैं आण मेहाई,

हर संकट दिखला प्रभुताई,

प्रांजल रै मां रहिज्यो सहाई,

देवराज नत होकर ध्याई,

अब तो आ ज्याओ मां,

कहो जी अंबे,

अब तो आ ज्याओ मां,

कि कद तक जोवां थारी बाट,

कहो कीनियाणी मां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।