आज थलवट धरा ऊपर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज थलवट धरा ऊपर,

भलो उग्यो भाण जी,

आज थलवट धरा ऊपर,

भलो उग्यो भाण जी,

आदि शक्ति हिंगला चा,

अवतरया है आण जी।

चारणा सो आप शाशन,

जगे जप री जाण जी,

मेहो देवल पिता माता,

तपस्या रे ताण जी,

चौदह सो माल में माँ,

ऐसी सुख लान जी,

तिथि सप्तम वार शुकर,

लगन आज लिखवान जी,

आज थलवट धरा ऊपर,

भलो उग्यो भाण जी,

देवता संग देव आए,

बैठ कर विमाण जी,

आई छांया अंबर ऊपर,

फुलड़ा बरसाण जी,

आज थलवट धरा ऊपर,

भलो उग्यो भाण जी,

जनम लीन्हो जगत जननी,

करण जग कल्याण जी,

करे सोहन घणे कोटा,

पाण निज बखान जी,

आज थलवट धरा ऊपर,

भलो उग्यो भाण जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।