जय काली कलकत्ते वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रण चंडी तूँ, है महाँकाली,

पाप भस्म, कर देने वाली,

*अष्ट भुजी माँ, शक्तिशाली,

वार तेरा न, जाए ख़ाली,,,( जय माता की )

जय काली जय काली काली,

जय काली जय काली l

जय काली कलकत्ते वाली,

जय काली जय काली ll

^चण्ड मुण्ड, महिषासुर मारे,

मधु कैटभ संग, असुर सँहारे ll

*गिरी देवता, पार उतारे,

*तूँ भक्तों की, है बाली,,,( जय माता की )

जय काली जय काली काली,

जय काली जय काली l

जय काली पटियाले वाली,

जय काली जय काली ll

^सुनके बिनती, भक्त जनन की,

चल के आए, चाल पवन की ll

माँ तूँ जानत, सब के मन की,

भर्ती है, झोली ख़ाली,,,( जय माता की )

जय काली जय काली काली,

जय काली जय काली l

जय काली माँ कालका वाली,

जय काली जय काली ll

^रण में दानव, माँ पर झपटे,

गिरे धरा पर, सिर कट कट के ll

भर भर खप्पर, खून के गटके,

पिए समझ, अमृत प्याली,,,( जय माता की )

जय काली जय काली काली,

जय काली जय काली l

जय काली कलकत्ते वाली,

जय काली जय काली ll

^ब्रह्मा विष्णु, गुण तेरे गाएं,

शंकर तुमरा, ध्यान लगाए ll

विक्की टोनी, द्वार ते आए,

**हर बिपता, तूने टाली,,,( जय माता की )

जय काली जय काली काली,

जय काली जय काली l

जय काली कलकत्ते वाली,

जय काली जय काली ll

जय काली पटियाले वाली,

जय काली जय काली ll

जय काली माँ कालका वाली,

जय काली जय काली ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।