जय काली जय काली जय काली माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय,,, जय जय माँ, जय,,, जय जय माँ lll

जय काली,,, कलकत्ते वाली,,,

तूँ ही माँ दुर्गा,,, तूँ महाँकाली,,, l

( जय काली, जय काली, जय काली माँ xll -ll )

तूँ ही दुर्गा,,, तूँ ही अम्बे,,, ll,

तूँ ही झंडेवाली माँ,,,

जय काली, जय काली, जय काली माँ xll

काल कालिका, रूप तुम्हारा, मुंडन की गले माला है ll

माँ मुसकाए, नागिन जैसी, बरसे नैनो से ज्वाला है l

चंचल चप्पला, सी चम चम चम ll,चमके भुजा में भुजाली माँ,

जय काली, जय काली, जय काली माँ xll

रण में बनकर, रण चंडी माँ, दुष्टों को ललकार रही ll

लाल लहू से, लसी हुई, लट लट काली फटकार रही l

लप लप चिप्या, लपकाए माँ ll, पिए लहू की प्याली माँ,

जय काली, जय काली, जय काली माँ xll

शुम्भ निशुम्भ को, मारा तूने, हाथ करोड़ों फैला के ll

माँ काली के, क्रोध से सारे, राक्षस भागे थर्रा के l

महिषासुर को, मारने वाली ll, तूँ अम्बे बलशाली माँ,

जय काली, जय काली, जय काली माँ xll

जब जब आई, क्रोध में माँ तूँ, शिव ने भार सँभाला है ll

लेट गए, चरणों में शँकर, देख के रूप विशाला है l

*जिहभा निकल, आई मईया की ll, शांत हुई तूँ काली माँ,

जय काली, जय काली, जय काली माँ xll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।