जहाँ बार बार जाने को भक्तों मन करता है हमारा

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज :-जहाँ डाल-डाल पर सोनेे की

जहाँ बार -बार जाने को, भक्तों मन करे हमारा,

वो खोली धाम है प्यारा, वो पावन धाम है न्यारा,

जहां मोहन नाम पाप हरे, श्री राम का मिले सहारा

जहाँ मन्दिर मोहन राम का,

मन को बड़ा लुभाये।

जहाँ सिंहासन नेत राम का,

भक्तों को न्याय चुकाये।

तोड़-जहाँ शिव दरबार निराला,

भक्तों का रखवारा,

वो खोली धाम है प्यारा...

जहाँ दीन दुःखी सब आते हैं,

और अपना कष्ट मिटाते है।

जहाँ कृष्ण अवतारी की महिमा,

भक्तशिरोमणी गाते,

तोड़-जहाँ राजा रंक लगाये अर्जी,

फल खाये जग सारा,

वो खोली धाम है प्यारा...

जहाँ सूनी गोद भरे किलकारी,

भक्त कभी ना तरसे,

जहाँ भाव भक्ति का भोग लगे और,

ममता झर झर बरसे,

तोड़-जहाँ अंधियारा जीवन से दूर हो,

आंगन हो उजियारा,

वो खोली धाम है प्यारा....

जहाँ हर दोज मेला लागे,

आये नर और नारी,

महेन्द्र फौजी को गले लगाले,

ओ मोहन तपधारी,

तोड़ -जहाँ गुरु ओ. पी. मोहन के भजन सुनाये,

ध्यान धरे जग सारा,

वो खोली धाम है प्यारा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।