मां बस यह वरदान चाहिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ बस यह वरदान चाहिए

जीवन-पथ जो कंटकमय हो

विपदाओं का घोर वलय हो

किन्तु कामना एक यही बस

प्रतिपल पग गतिमान चाहिए॥

हास मिले या त्रास मिले

विश्वास मिले या फाँस मिले

गरजे क्यों न काल ही सम्मुख

जीवन का अभिमान चाहिए॥

जीवन के इन संघर्षो में

दुःख-कष्ट के दावानल में

तिल-तिल कर तन जले न क्यों पर

होंठों पर मुस्कान चाहिए॥

कंटक पथ पर गिरना चढ़ना

स्वाभाविक है हार जीतना

उठ-उठ कर हम गिरें उठें फिर

पर गुरुता का ज्ञान चाहिए॥

मेरी हार देश की जय हो

स्वार्थ -भाव का क्षण-क्षण क्षय हो

जल-जल कर जीवन दूँ जग को

बस इतना सम्मान चाहिए॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।