जय जय जय हे त्रिशक्ति

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय जय जय हे त्रिशक्ति सरस्वती ब्रह्मा नादुर धरती

जय जय जय जय हे त्रिशक्ति।

पुष्प कमल पर आप बिराजे हाथों में वीणा को साजे

स्वर की साधना करने वाला पा जाए मां विमल मति

जय जय जय जय हे त्रिशक्ति...

ओंकार ब्रह्म नाद कहलाए अंतर में चित शक्ति जगाए

नित्य ब्रह्म नाद करने वाला आ जाए वह परम गति

जय जय जय जय हे त्रिशक्ति....

हेमोकेअर तेरा मुकुट सा चमके सागर तेरे चरण पखारे

मन हरती सारे जग का भारत मां तेरी शुभ आकृति

जय जय जय जय जय हे त्रिशक्ति......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।