वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर

माँ के ही संकेत पे हो दिन रैन साँझ और भौर,

संसार का आधार है वैष्णो माता,

ममता रूपी सार है, वैष्णो माता,

अपरम्पार हैं माँ की महिमा,

अमित हैं गाथा गौरव गरिमा,

संसार का संचार है वैष्णो माता

संसार का निर्माण है वैष्णो माता

नवदेवी का रूप है माँ,

महाशक्ति स्वरूप है माँ

पालनहारी है माँ त्रिकुटा,

कहीं छाँव कहीं कहीं धूप है माँ,

रंग केसरिया माँ का बाला,

सिन्दूरी रंग अंग सुहाना,

संसार का संचार है वैष्णो माता,

संसार का निर्माण है वैष्णो माता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।