लाल सिंघा पे खेल रहीं मैया मेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लाल सिंघा पे खेल रही मैया मेरी,

कंगना मुंदरी बुहटा पहने,

हाथ खप्पर ले खेल रही मैया मेरी,

लाल सिंघा.........

लट बिखराये मचल रही मैया ,

जीभ लालइ निकाल रही मैया मेरी,

लाल सिंघा.......

खप्पर खड्ग लये हैं मैया,

नयना लालइ निकाल रही मैया मेरी,

लाल सिंघा......

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।