मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो

अलका गोएल
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो

मैं वी दर तेरे ते आयी होई आ

मेरे कर्मा वल ना वेखियो जी,

मैं वी कर्मा तो शरमाई होई आ,

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो,

मैं वी दर तेरे ते आयी होई आ,

जो दर तेरे ते आ जांदा,

ओह असल खजाने पा जांदा,

मैं वी दर ते आस लगाई होई आ,

मैनु दर ते खली मोड़ी ना,

मैं वी दर तेरे ते आयी होई आ,

तुसी तारणहार कहन्दे हो,

दुबेया नु बनने लांदे हो,

मेरा भी बेडा पार करो,

मैं वी दर तेरे आयी होई आ,

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो,

मैं वी दर तेरे ते आयी होई आ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।