दुर्गा महारानी माँ शारदा भवानी माँ

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दुर्गा महारानी माँ, शारदा भवानी माँ

दुर्गा महारानी माँ,शारदाभवानी माँ,

वैष्णोंमहारानी माँ, सरस्वतीकल्याणी माँ,

ब्रह्मरूपिणी माँ, विष्णुस्वरूपिणी माँ,

रुद्ररूपिणी माँ, शक्तिस्वरूपिणी माँ,

ब्रह्मवादिनी माँ, सिद्धिदायिनी माँ ,

बुद्धिदायिनी माँ , धर्मधारिणी माँ,

व्याधिनाशिनी माँ, भयहारिणी माँ,

भवभामिनी माँ, भवतारिणी माँ

परधामनिवासिनी माँ, महाविलासिनी माँ,

शमशानबिहारिणी माँ, ताण्डवलासिनी माँ,

विद्यादायिनी माँ,विज्ञानप्रदायिनी माँ,

ज्ञानदायिनी माँ, शुभवरदायिनी माँ,

मृगवाहिनी माँ, शूलधारिणी माँ ,

खड्गधारिणी माँ, त्रिशूलधारिणी माँ ,

शत्रुविनाशिनी माँ, सौभाग्यदायिनी माँ ,

विश्वमोहिनी माँ, सौभाग्यशालिनी माँ ,

दुर्गसाधिनी माँ, दुर्गनाशिनी माँ ,

वरदायिनी माँ,दुर्गदारिणी माँ,

विश्वार्तिहारिणी माँ, मुक्तिप्रदायिनी माँ ,

पापनाशिनी माँ, शोकविनाशिनी माँ ,

निशुम्भमर्दिनी माँ, शुम्भविनाशिनी माँ ,

सर्वास्त्रधारिणी माँ, चण्डमुण्डघातिनी माँ,

वीणाधारिणी माँ, हंससुबाहिनी माँ ,

वैभवशालिनी माँ, भयविनाशिनी माँ ,

सुरमुनिमोहिनी माँ, ज्ञानरूपिणी माँ ,

ब्रह्मचारिणी माँ, सिंहवाहिनी माँ ,

आभार:ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।