जागरण की रात मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जागरण की रात मैया जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओ

आस लगाएं बैठे हैं माँ अब तो दरश दिखाओ

तेरे भक्तों ने मैया तेरी जोत जगाई,

तेरे लिए महामाई चुनरी लाल मंगाई,

पान सुपारी हलवा पूरी आकर भोग लगाओ,

जागरण की रात मैया.....

तेरी शेर सवारी भक्तों के मन भाई,

दरश बिना अब तेरे इक पल रहा ना जाएं,

जल्दी से तुम आ जाओ माँ अब ना देर लगाओ,

जागरण की रात मैया.....

पाठक केसरी मैया तेरी दिल से भेंटें गाएं,

जो भी दर पे आता झोली भर के जाएं,

लाडी की की भी मैया जी अब बिगड़ी बात बनाओं,

जागरण की रात मैया ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।