टूटा फूटा सा घर एक बनाया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

टूटा फूटा सा घर एक बनाया

उस में तेरा माँ मंदिर सजाया

मंदिर में माँ मूर्ती बिठा कर

सच्चे दिल से मैया ज्योत जगा कर

अँखियाँ बंद कर करूँ पुकार

आजा माँ आजा माँ आजा माँ आजा माँ

मुझको यकीन है इक दिन माँ आएगी

बिगड़ी मेरी बात बन जायेगी

मन में विश्वास है दिल में जगी आज आस है

छूटे जग सारा मुझे तेरा एहसास है

अँखियों से माँ रूकती नहीं अँसुअन की या धार माँ

आजा माँ आजा माँ ......................

झूठे जगत की माया ना भाये

कितना कोई मुझे समझाए

मैं तो मैया का दरस दीवाना

अपना तुझको जबसे माना

आज नहीं तो कल आओगी मुझको इंतज़ार माँ

आजा माँ आजा माँ ......................

धन दौलत ना सुख की चाहत

करता रहूं सदा तेरी इबादत

हर पल जपूँ तेरे नाम की मैं माला

मन में करो सदा सच का उजाला

चरणों के स्पर्श को राजीव कब से बेकरार माँ

आजा माँ आजा माँ ......................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।