मेहंदी राचण लागी हाथां में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेहंदी राचण लागी हाथां में, माजीसा रे नाम री,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज री,

आई आई रे तेरस, उजियाळी चाँदणी,

हाथां मेहंदी रे रचाई, माजीसा रे नाम री।

सोजत नगरी सूं मेहंदी मंगाई,

सोने कटोरे थारी मेहंदी गळाई,

बाँटी बाँटी रे मेहदी भगता ने,

थारा नाम की,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी।

पाँच पचेता थारे, नाम रा लगाया,

भगतारा मां भटीयाणी, भाग जगाया,

आयो आयो रे रंग गहरो, माँ थारे नाम को,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी।

भायो माजीसा रे मन, मेहँदी रंग राचो,

जग रखवाली मैया, आवे ना घाटो,

जग रे रखवाली माजीसा, आवे ना घाटो,

देवे देवे है माजीसा, कमी ना कोई बातरी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी।

मेहंदी को रंगड़ो छायो, छायो जगड़ा में,

नव खूँटा चौदह भवन में, रंग दुनियाँ आवे,

गावे गावे है मालीड़ो, चरणा राखे ध्यान जी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी।

मेहंदी राचण लागी हाथा में, माजीसा रे नाम री,

आई शुभ घडी देखो, म्हारे आँगन आज री,

आई आई रे तेरस, ऊजीयालि चांदणी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी,

आई शुभ घड़ी देखो, म्हारे आँगन आज जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।