गोरा भांग गोटदे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रे गोरा रिम झूम पड़े फुहार यो मस्त महीना सावन का,

रे जल्दी रगड़े क्यों न भांग खिलेगी मूड बनावन का

ठंडी ठंडी पवन चले बिन भांग धटा न जावे

काची काची भांग देख मेरी भूख बड ती जावे

रे गोरा मिल जा तने परनाम देख ले मने सतावन का

रे जल्दी रगड़े क्यों न भांग खिलेगी मूड बनावन का

मैं और किसी का लाडा न बस भांग का घना सवादु

घोटन ने अरे और घोटे रे पर तेरे हाथ में जादू

हे गोरा कौन सा करु उपाए बता दे तने मनावन का

रे जल्दी रगड़े क्यों न भांग खिलेगी मूड बनावन का

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।