मेरी नैया भवर में फसी है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जिन्दगी अब तुम्हारे हवाले कोई दूजा सहारा नही माँ,

मेरी नैया भवर में फसी है कोई दीखता किनारा नही माँ

मैं दुखयारी विपदा की मारी द्वार तिहारे आये माँ

खाली झोली भर दे मेरी बैठे आस लगाये माँ

खोल दे माँ नसीबो के ताले

कोई जग में हमारा नही माँ

मेरी नैया भवर में फसी है कोई दीखता किनारा नही माँ

जीने का अधिकार माँ देदो थोडा सा बस प्यार माँ देदो

ऐसा कौन जगत माँ तेरा छोटा सा संसार माँ देदो

बस गले से मुझे माँ लगा ले वरना जीवन गवारा नही माँ

मेरी नैया भवर में फसी है कोई दीखता किनारा नही माँ

हे जगजनी आंबे भवानी किरपा करो हे रानी माँ

हर संकट से बचा के रखना करना माफ नादानी माँ

सदा जीवन में रखना उजाले

वरना कोई सहारा नही माँ

मेरी नैया भवर में फसी है कोई दीखता किनारा नही माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।