मना चल वृन्दावन चल वे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ मन चल वृन्दावन चलवे मना,

एथे ओह नजारा नही मिलना,

ओह एथे ओ नजारा नही मिलना,

ओह एथे प्रीतम प्यारा नही मिलना,

ओह मन चल वृन्दावन चल वे मना,

एथे ओह नजारा नही मिलना

ओह किथे मिलनगे बाँके बिहारी,

संग होवेगी राधा प्यारी,

हो राधा राधा राधा राधा,

श्री राधा राधा राधा राधा,

ओह किथे मिलनगे बाँके बिहारी,

संग होवेगी राधा प्यारी,

हुन गुरु चरणा विच लग वे मना,

बिन सतगुरु प्यारा नही मिलदा,

मन चल वृन्दावन चल वे मना,

एथे ओह नजारा नही मिलदा

जिथे रहमत पायी बरसदी ए

जिथे औँन नु दुनिया तरसडी ए

हुन चल वे मन्ना हुन देर ना ला

इथे प्रीतम प्यारा नई मिलणा

इथे बड़े ही मस्त नजारे ने

जेड़ा आउंदा वारे न्यारे ने

हुन गुरु चरणा विच लग वे मन्ना

इथे ओ नजारा नई मिलणा

भजन गायक

(मनीष अनेजा जी)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।