मेरी माँ जगदम्बे इस जग की पालनहारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माँ जगदम्बे इस जग की पालनहारी

ध्यान सभी का रखती तेरी महिमा है न्यारी

पाप और अवगुण हर लेती है हे माँ तारण हारी

मेरी माँ जगदम्बे इस जग की पालनहारी

हो जाये जो दया तुम्हारी रोग दोष मिट जाए

जन्म मरन के मैया सारे बंधन है कट जाये

कलयुग में हे भवानी बस तू ही है कल्याणीतेरा बंधन करते मैया

देव ऋषि नर नारी

मेरी माँ जगदम्बे इस जग की पालनहारी

तेरे द्वार से शेरोवाली गया न कोई खाली

तेरी मेहर रही है मैया मंगल करने वाली

धन यश भेभव देती तू बाधा सब हर लेती

मिटे शरण में तेरी मैया इक पल में लाचारी

मेरी माँ जगदम्बे इस जग की पालनहारी

तेरे बिन है कौन हमारी बस माँ तू सहारा

भव में डूब रही नैया का मैया तू ही किनारा

चरनो में ये जीवन कर दिया है मात समर्पण

जग जन जाल से पार लगाओ हे माँ खेवन हारी

मेरी माँ जगदम्बे इस जग की पालनहारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।