उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी,

थोड़े से जीण के खातिर कांयी सौवे।

गहरा गहरा होद भरया घट भीतर ,

नाडुली में कपड़ा सूरता कांयी धोवे,

उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी

हीरा री खान भरी घट भीतर,

कर्म कांकरिया सूरता कांयी टोवे,

उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी

गहरा - गहरा दीप चसे घट भीतर,

बातुलि में दिवलो सूरता कांयी जोवे,

उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी

कहत कमाली कबीरा की बाली,

मोतीड़ा री माला कबीरो पोवे,

उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी,

उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी ,

अब थोड़े से जीण रे खातिर कांयी सौवे,

उड़ ज्या नींद भंवर सैलानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।