दो गज कफ़न का टुकड़ा तेरा लिबास होगा

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॥ पावन पाठ ॥

जाएगा जब जहाँ से, कुछ भी ना पास होगा ।

दो गज कफ़न का टुकड़ा तेरा लिबास होगा ॥

काँधे पे धर ले जाए परिवार वाले तेरे ।

यमदूत ले पकड़कर डोलेंगे घेरे घेरे ।

पीटेगा छाती अपनी, मनवा उदास होगा ॥

चुन चुन के लकडियो में रखदें तेरे बदन को ।

आकर झट उठा ले तेरे कफ़न को ।

देदेगा आग तुझमे, बेताब ख़ास होगा ॥

मिट्टी में मिले मिट्टी, बाकी ख़ाक होगी ।

सोने सी तेरी काया, जल कर के राख होगी ।

दुनिया को त्याग तेरा, मरघट में वास होगा ॥

प्रभु का नाम जपते भाव सिन्धु पार होते ।

माया मोह में फंस कर जीवन अमोल खोते ।

हरी का नाम जपले बेडा जो पार होगा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।