पधारो गे गणपति मेरे आंगन में

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

किस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में,

बेह जाए न कुटिया मेरी आंसुयो के सावन में

किस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में,

तुम्हे कसम है भोले की तुम्हे कसम है गोरा की

तुम्हे भरनी ही होगी खुशिया मेरे दामन में

किस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में,

है सूना यही हमने तुम पालनहारे हो

क्यो गमो के साए है देवा मेरे जीवन में

किस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में,

लिखते हो तुम्ही देवा किस्मत की लकीरों को

तकदीर बंधी बोलो मेरी किस बंधन में

किस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में,

मैं पलके जब खोलू दीदार तुम्हारा हो

जीवन भर तुम रेहना मेरे मन के दर्पण में

किस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।