गोटे की चुनरी गोरा ईसर जी लाए

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॥ पावन पाठ ॥

गोटे की चुनरी गोरा ईसर जी लाए,

तुम पहनो मेरी गोरा रानी, काहे शर्माए,

तुम पहनो मेरी गोरा रानी, काहे शर्माए,

गोटे की चुनरी गोरा, ईसर जी लाए,

तुम पहनो मेरी गोरा रानी, काहे शर्माए

टीका नथली झुमका मैया,

हम भी लेकर आएं हैं,

मोतियन से हम माँग सजाए,

बिंदिया लाल लगाएं हैं,

हमको भी देना मैया अमर सुहाग रै,

हम भी ओढ़ेंगे मैया चुनरिया लाल रै,

गोटे की चुनरी गोरा, ईसर जी लाए,

तुम पहनो मेरी गोरा रानी, काहे शर्माए।

हरवा चुड़ला हथफूल मैया हम भी लेकर आएंगे,

फूलो का हम गजरा लाये महंदी लाल लगाएंगे,

हमको भी देना मैया अमर सुहाग रे,

हम भी ओढ़ेंगे मैया चुनरिया लाल रे,

गोटे की चुनरी गोरा, ईसर जी लाए,

तुम पहनो मेरी गोरा रानी, काहे शर्माए।

तगड़ी गुच्छा पायल गोरा हम भी लेकर आएंगे,

बिछुआ भी पहनाएंगे और महावर भी लगाएंगे,

हमको भी देना मैया अमर सुहाग रे,

हम भी ओढ़ेंगे मैया चुनरिया लाल रे,

गोटे की चुनरी गोरा, ईसर जी लाए,

तुम पहनो मेरी गोरा रानी, काहे शर्माए।

लेहंगा चुनरी साड़ी गोरा हम भी लेकर आएंगे

पहन ओढ़ कर गोरा रानी पाटे पर बैठाएंगे

सोलह शृंगार मैया हम भी करेंगे

ईसर गोरा की हम भी पूजा करेंगे

हमको भी देना मैया अमर सुहाग रे

हम भी करेंगे मैया सोलह शृंगार रे

गोटे की चुनरी गोरा, ईसर जी लाए,

तुम पहनो मेरी गोरा रानी, काहे शर्माए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।