आज तो गोरा रे देखो बनी रे दुल्हनिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज तो गोरा रे देखो बनी रे दुल्हनिया

चली ईसर जी के साथ जरा देखन दो, देखन दो,

शीश गोरा के रखड़ी सोहे कान गोरा के झाले सोहे,

यामे जड़े है नगीना जरा पहनन दो पहनन दो,

गले गोरा के हरवा सोहे हाथ गोरा के चुड़ला सोहे,

यामे जड़े है नगीना जरा पहनन दो पहनन दो,

आज तो गोरा रे देखो बनी रे दुल्हनिया,

चली ईसर जी के साथ जरा देखन दो देखन दो,

कमर गोरा के तगड़ी सोहे पैर गोरा के पायल सोहे,

पैर गोरा के बिछुआ सोहे वामे जड़ा है नगीना,

जरा पहनन दो पहनन दो आज तो गोरा रे देखो,

बनी रे दुल्हनिया चली ईसर जी के साथ,

जरा देखन दो देखन दो...

कमर गोरा के लहँगा सोहे अंग गोरा के अँगिया सोहे,

शीश गोरा के चुनर सोहे यामे जड़े है सितारे,

जरा ओढ़न दो ओढ़न दो आज तो गोरा रे देखो,

बनी रे दुल्हनिया चली ईसर जी के साथ,

जरा देखन दो देखन दो,

हम तो जिमाये गोरा गुना और घेवर,

जीमो ईसर जी के साथ झांकी देखन दो देखन दो,

जीमो ईसर जी के साथ झांकी निरखन दो निरखन दो,

आज तो गोरा रे देखो बनी रे दुल्हनिया,

चली ईसर जी के साथ जरा देखन दो, देखन दो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।