थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

तेरी ज्योत जली दुनीयाँ भर में मोरे खाटू जी सरकार,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में

शीश को है तू दानी सारी दुनीयाँ ने मानी,

थे तो तीन बाण हो धारी,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

मोरे खाटू जी सरकार,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

फागुन को है यो महीनों,

बाबा को लाग्यो है मेलो,

सारे भर भर खेले गुलाल,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

मोरे खाटू जी सरकार,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

कोई लावे नीलो पीलो,

कोई लावे रंग गुलाबी,

थारे केसरिया है लगावे,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

मोरे खाटू जी सरकार,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

सबकी बाबा सुनता,

थे सबकी लाज बजाता,

केशव आयो थारे द्वार,

म्हे आया थारे द्वार,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,

मोरे खाटू जी सरकार,

थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।