श्याम धणी की नगरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हाथ जोड़ विनती करूँ सुणज्यो चित्त लगाय,

दास आ गया शरण में प्रभु राखो म्हारी लाज

बाबा श्याम धणी की नगरी,

घणी प्यारी लागे, ओ घणी प्यारी लागे,

म्हाने मीठो मीठो श्याम कुंड को,

पाणि लागे, बाबा, ओ बाबा श्याम

ग्यारस को दरशन को आवे,

लाखों नर और नारी,

सबकी विनती पल में सुनते,

श्याम की महिमा न्यारी,

श्याम रंग में रंगी या,

खाटू नगरी लागे, ओ खाटू नगरी लागे,

ओ म्हाने मीठो मीठो श्याम कुंड को,

पाणि लागे, बाबा, ओ बाबा श्याम।

ग्यारस को खाटू में प्रेमी भजन भाव जद गावे,

ऐसो लागे श्याम धणी भी मंद मंद मुस्कावै,

श्याम प्रेमियों की मस्ती,

में मलंग नाचे, हो मलंग नाचे,

ओ म्हाने मीठो मीठो श्याम कुंड को,

पाणि लागे, बाबा, ओ बाबा श्याम।

फागण की ग्यारस की खाटू में मेलो लागे भारी,

चंग धमाल गुलाल उड़े,

खाटू की नगरी प्यारी,

तोरण द्वार की छवि तो,

मनमोहक लागे, ओ मनमोहक लागे,

ओ म्हाने मीठो मीठो श्याम कुंड को,

पाणि लागे, बाबा, ओ बाबा श्याम

श्याम बगीची जद म्हे जावा मनड़ो यो हर्षावे,

भगत श्री आलू सिंह जी रा,

दर्शन रा फल पावे महावीर तो दीवाना,

जग यो सारो जाणे, हो जग यो सारो जाणे,

ओ म्हाने मीठो मीठो श्याम कुंड को,

पाणि लागे, बाबा, ओ बाबा श्याम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।