माँ की चुनरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मईया,,, मेरी मईया, मईया,,, दुर्गा मईया,,,

माँ की चुनरिया,,, माँ की चुनरिया,,, xll

ओढ़ चुनरिया मईया, दर्स दिखाना ll,

दर्स दिखा के मेरे, भाग जगाना ll

माँ की चुनरिया,,, माँ की चुनरिया,,, xll

लाल चुनरिया तेरी, ब्रह्मा ने बनाई है l

चाँद सितारों की, झालर लगाई है ll

विष्णु ने रंगवाई, फूलों संग महकाई ll,

देख देख थकता न, इसको ज़माना,,,

( दर्स दिखा के मेरे, भाग जगाना )

माँ की चुनरिया,,, माँ की चुनरिया,,, xll

ओढ़ चुनरिया मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

लाल चुनरिया माँ के, मन को है भाती l

जो भी चढ़ाये उस पे, किरपा बरसाती ll

वर देती वर दाती, दुःख हरे जग दाती ll,

चरणों में जो भी करे, इस के ठिकाना,,,

( दर्स दिखा के मेरे, भाग जगाना )

माँ की चुनरिया,,, माँ की चुनरिया,,, xll

ओढ़ चुनरिया मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

चुनरी मईया की, ममता की है निशानी l

यूँ ही नहीं है इसकी, दुनियाँ दीवानी l

कोई ना इस का साहनी, आदि शक्ति महाँरानी ll,

गा गा के महिमा सब को, हर्ष सुनाना,,,

( दर्स दिखा के मेरे, भाग जगाना )

माँ की चुनरिया,,, माँ की चुनरिया,,, xll

ओढ़ चुनरिया मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।