मोरछड़ी लहरादों थारी कामंगारी रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कामंगारी रे सांवरा कामंगारी रे

मोरछड़ी लहरादों थारी कामंगारी रे

थारे सिर पे पड़ गी आज या विपदा भारी रे

मोरछड़ी लहरादों थारी कामंगारी रे

मोरछड़ी हां जादूगारी चमत्कार दिख लावे

सोई किस्मत का ताला इक झाड़ा से खुल जावे

थारे हाथ से श्याम बना दो बिगड़ी म्हारी रे

मोरछड़ी लहरादों थारी कामंगारी रे

बीच भवर में ढोल रही मैं नही खेलु जानू

तेरे हाथ में सोंप दी नैया तैने अपनों मानु

खीच किनारे लेकर आयो पार उतारी रे

मोरछड़ी लहरादों थारी कामंगारी रे

जद भी सोचु आप पे बीती आंसू न बेह जावे

उन आंसू के हर कतरे में श्याम नजर तू आवे

घर की चोकठ लांग न पाई पीढ बिचारी रे

मोरछड़ी लहरादों थारी कामंगारी रे

मैं नही दीन आनाथ संवारा ये तू नाथ है म्हारो

जाने सारी दुनिया म्हाने तेरो एक सहारो

आज सचिन ने श्याम दिखा दे तू दातारी रे

मोरछड़ी लहरादों थारी कामंगारी रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।