॥ पावन पाठ ॥
गौरी के लाल पहला थाने मनावा जी,
मनवा चरणों में डोक लगवा गोरी के लाल ,
जोती जलवा थारी धुप दिखावा,
रोली तिलक लगवा जी गोरी के नाथ,
गौरी के लाल पहला थाने मनावा जी,
फूल वी लगावा थारे झुला सजावा,
रेशम की धोरी से झुलावा जी गोरी के लाल,
गौरी के लाल पहला थाने मनावा जी.....
विगन निवारो देवा कारज सवारों,
जनिरो छतर चडवा जी गोरी के लाल
गौरी के लाल पहला थाने मनावा जी......
अन्दन नु आख देवो कुदान ने काया
में तो दया द्रिष्टि चावा जावा जी,
गौरी के लाल पहला थाने मनावा जी....