गोकुल से आयो राधे तेरी नगरी में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोकुल से आयो राधे तेरी नगरी में,

मारु पिचकारी आज तेरी चुनरी में,

वेलकम है कान्हा तेरो मेरी नगरी में,

घोल रंग बैठी मैं तो तोकु गगरी में

मेरी तेरी आज खिलेगी बड़े प्रेम से होली,

अटारी पे क्यों ठाड़ी निचे आजा तू किशोरी,

रंग बिरंगी करके जाऊँ सखियाँ सगरी,

मारु पिचकारी आज तेरी चुनरी में

थोड़ी सी बजाय दे प्यारी बांसुरियां,

बरसाने में रंग बरसेगा तेरो साँवरिया,

तेरे नाम के चमके सितारे मेरी चुनरी में,

घोल रंग बैठी मैं तो तोकु गगरी में,

वेलकम है कान्हा तेरो मेरी नगरी में,

घोल रंग बैठी मैं तो तोकु गगरी में

बरसाने में धूम मचावे राधा मोहन तेरो,

आजा गोरी डरवाले तू रंग गुलाबी मेरो,

हेरे हाथ से खाकर जाऊं माखन मिश्री मैं,

मारु पिचकारी आज तेरी चुनरी में,

हो मारु पिचकारी आज तेरी चुनरी में

आजा बहन विशाखा रंग रंग रसिया पे डारो,

गोकुल से आयो कान्हा यो मन को प्यारो,

कान्हा पकड़ नचाऊं, बाँधू पैर घुंघरी में,

घोल रंग बैठी मैं तो तोकु गगरी में,

वेलकम है कान्हा तेरो मेरी नगरी में,

घोल रंग बैठी मैं तो तोकु गगरी में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।