भजना सूं लागे मीरा मीठी

मीरा बाई
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॥ पावन पाठ ॥

भजना सूं लागे मीरा मीठी,

मेवाड़ी रे राणा जी,

भजना सूं लागे मीरा मीठी

का तो मीरा तेरा रमईयो बता दे,

नी तो बता रे सारी झूठ

मेवाड़ी रे राणा जी भजना सूं लागे मीरा मीठी

म्हारो तो रमियो रे घट घट बसे,

थारी हिये री क्यों फूटि मेवाड़ी रे राणा जी,

भजना सूं लागे मीरा मीठी....

म्हारो तो रमियो रे सिर के रो सेवरो,

तू तो कर री अँगूठी मेवाड़ी रे राणा जी,

भजना सूं लागे मीरा मीठी....

संकड़ी गली मैं राणा जी मिलियो,

मीरा फिर गी अपूठी मेवाड़ी रे राणा जी,

भजना सूं लागे मीरा मीठी....

कह मीरा बाई प्रभु गिरधर नागर,

हर चरणा की दासी मेवाड़ी रे राणा जी,

भजना सूं लागे मीरा मीठी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।