गुरु जी मेरी पूजा करो स्वीकार

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॥ पावन पाठ ॥

नन्हा सा फूल हूँ मैं, चरणों की धुल हूँ मैं ।

आया हूँ मैं तो तेरे द्वार, गुरु जी मेरी पूजा करो स्वीकार ॥

सुन लो हमारी अर्जी, मुझ को कुछ ज्ञान दो,

जीवन को जीना सीखूं ऐसा वरदान दो ।

सूरज सी शान पाऊं, चंदा सा मान पाऊं,

इतना सा देदो उपहार, गुरु जी मेरी पूजा करो स्वीकार ॥

मैं तो निर्गुणिया हूँ, बस इतनी सी बात है,

मेरे जीवन की डोरी अब तेरे हाथ है ।

थोडा सा गुण मिल जाए, निर्धन को धन मिल जाए,

मानू तुम्हारे उपकार, गुरु जी मेरी पूजा करो स्वीकार ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।