बाबा मेरी नैया को

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा मेरी नैया को तुम पार लगा देना

अब तक तो निभाया है आगे भी निभा देना

तूने दीं दुखी सब को मेरे बाबा तारा है

मुझ दीं दुखी को भी बाबा लगा देना

बाबा मेरी नैया को तुम पार लगा देना

बाबा दर दे तेरे कोई खाली नही जाता है,

मेरी झोली खाली है मेरी झोली भर देना

बाबा मेरी नैया को तुम पार लगा देना

कोई केहता पौनाहारी कोई केहता दुधाधारी

बाबा की चमत्कारी मुझे पार लगा देना

अब तक तो निभाया है आगे भी निभा देना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।